Friday, 16 May 2014

तू है माना बेखता मेरी तरह,
फिर भी काटेगा सज़ा मेरी तरह.

तंग अपने जिस्म से इतना है तो,
देखना होगा रिहा मेरी तरह.

सुख का वो लम्हा जिसे सब ढूंढते,
इन दिनों है लापता मेरी तरह.

हादसे रस्ता तुझे दिखलायेंगे,
उनको देता रह दुआ मेरी तरह.

छोड़कर मुझको कहाँ अब जायेगी,
है घुटन भी बावफ़ा मेरी तरह.

हौंसला तुझमें अगर बाकी नहीं,
वक़्त को मत आज़मा मेरी तरह.

ज़िन्दगी छोटी बहर की है ग़ज़ल,
लिख इसे फिर गुनगुना  मेरी तरह.

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